चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों के कारण पूरी दुनिया की नजरों में है। क्योंकि ये कई देशों की सीमाओ पर घुसपैठ कर चुका है तथा अवैध कब्ज़ा कर चूका है। कई देश न केवल चीन की उभरती ताकत से परेशान हैं, बल्कि उसकी नीतियों से डरे हुए भी हैं। हालांकि, भारतीय नेतृत्व और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय सैनिकों ने हमेशा ड्रैगन की सेना के साथ आंखें मिलाकर बात की है। और उनके हर हरकतों का मुँह तोड़ जबाब दिया है , भारत ने ड्रैगन की विस्तारवाद नीतियों की खुले मंच पर खुलकर आलोचना की है। यही नहीं, हाल ही के घटनाओं में चीनी सैनिकों को LAC से अपने कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बाद दुनिया में भारत का कद और बढ़ा है, दुनिया के शक्तिशाली देशों ने भारत की इस जवाबी ताकत पर विश्वास करना शुरू कर दिया है।
मुख्य अमेरिकी थिंक टैंक विज्ञान और प्रौद्योगिकी (आईटी) नीति में कहा गया है कि अमेरिका सामरिक दृष्टि से उभरते हुए चीन को नकेल लगाना चाहता है और एशिया में भारत के अलावा कोई अन्य देश ऐसा नहीं है, जिसके पास अत्यधिक कुशल तकनीकी पेशेवर हैं और जो अमेरिका के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं।

थिंक टैंक ‘इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फाउंडेशन (आईटीआईएफ) ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही। उन्होंने यह कहते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका को भारत पर “अत्यधिक निर्भर” होने के लिए चेताया है कि अगर बौद्धिक संपदा, डेटा हैंडलिंग, शुल्क, करों, स्थानीय सामग्री आवश्यकताओं या व्यक्तिगत गोपनीयता जैसे मामलों पर दोनों देशों के बीच प्रमुख मतभेद उत्पन्न होते हैं। , तो आईटी सेवा प्रदाता भारत एक रणनीतिक समस्या बन सकता है।” उसने इस बारे में अपनी राय स्पष्ट की।

रिपोर्ट सबसे खराब और बेहतरीन परिदृश्यों को देखती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक परिदृश्य भारत और चीन के बीच तनाव को कम करना और दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था पूर्व की ओर शिफ्ट हो जाएगी और अमेरिका इसके बारे में कुछ खास नहीं कर पाएगा। और उसके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
रिपोर्ट के अनुसार दूसरा परिदृश्य यह है कि भारत और अमेरिका समान हित साझा करते हैं क्योंकि चीन आर्थिक, सैन्य और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसी स्थिति में, अधिकांश विकसित देशों में लोकतांत्रिक नियम लागू होंगे, क्योंकि विकासशील देश, बीजिंग मॉडल ’के बजाय दिल्ली मॉडल को देखेंगे।

थिंक-टैंक ने कहा, “अमेरिका उभरते हुए चीन को रोकना चाहता है और इस तरह, भारत के अलावा कोई अन्य महत्वपूर्ण देश नहीं है, जो आकार में बहुत बड़ा है, जिसके पास अत्यधिक कुशल तकनीकी पेशेवर हैं और अमेरिका के साथ मजबूत राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।”

ITIF के सदस्य और रिपोर्ट के सह-लेखक डेविड मोशेला ने कहा “जो सेनाएं अमेरिका और चीन के बीच मतभेद बढ़ा रही हैं, वे अमेरिका और भारत को करीब ला रही हैं।” उन्होंने कहा “अमेरिका, भारत और चीन के रिश्ते आने वाले कई वर्षों के लिए वैश्विक प्रतिद्वंद्विता और डिजिटल आदान -प्रदान को आकार देंगे,”। व्यापक संभावित परिदृश्य के बीच दो चीजें स्पष्ट हैं: भारत को चीन का सामना करने और उस पर अपनी निर्भरता कम करने के अमेरिकी प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए, और इससे अमेरिका की वैश्विक निर्भरता विनिर्माण से सेवाओं तक बढ़ जाएगी। ”

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास, नवाचार केंद्रों, मशीनों, विश्लेषण, उत्पाद डिजाइन और जांच और आईटी और जीव विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। जो उसके लिए भविष्य में आत्मनिर्भरता के नए रस्ते खोलेंगे।