महाराष्ट्र में जिस तरह के कोरोना वायरस के नए मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में एक बार फिर से इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या महाराष्ट्र फिर से लॉकडाउन की ओर बढ़ रहा है? इन अटकलों को बल और इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि शिवसेना के मुखपत्र सामना ने भी लॉकडाउन की ओर इशारा कर दिया है। सामना में कहा गया है कि अगर लोगों को लॉकडाउन से बचना है तो उन्हें खुद कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इससे पहले महाराष्ट्र में कैबिनेट मंत्री मंगलवार को कहा था कि शहर में आंशिक रूप से लॉकडाउन लगाया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन इस पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इसी रफ्तार से कोरोना के मामले बढ़ते रहे तो लॉकडाउन के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता है।

अब खुद शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने लोगों को चेता दिया है कि अगर वे कोरोना नियमों का पालन नहीं करते हैं तो महाराष्ट्र के लोगों को एक बार फिर से लॉकडाउन झेलने के लिए तैयार रहना होगा। सामना ने लिखा- टीका आ जाने के कारण लोगों ने चैन की सांस ली ही थी कि महाराष्ट्र सहित देशभर में कोरोना के मरीज बढ़ने लगे हैं, उनमें महाराष्ट्र का आंकड़ा ज्यादा है जो कि चिंताजनक है। महाराष्ट्र में प्रतिदिन औसतन 10 हजार नए मरीज कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं और70-75 लोगों की जान जा रही है। प्रशासन ने कई क्षेत्रों में आंशिक लॉकडाउन शुरू किया। ठाणे और नासिक जैसे शहरी क्षेत्रों में कोरोना का ‘हॉट स्पॉट’ बन गया।’

सामना ने लिखा कि अब लोगों को आत्म-अनुशासन बनाए रखना चाहिए और खुद पर कुछ प्रतिबंध लगाने चाहिए। इसका ध्यान रखना होगा, अन्यथा लॉकडाउन या सख्त प्रतिबंध से नहीं बचा जा सकता। बता दें कि ठाणे के 11 हॉटस्पॉट में 31 मार्च तक लॉकडाउन का ऐलाान कर दिया गया है। ठीक इसी तरह उद्धव ठाकरे ने स्थानीय प्रशासन और बीएमसी को हॉटस्पॉट इलाकों में लॉकडाउन को लेकर फैसले लेने की स्वतंत्रता दे दी है।

 

सामना में मोदी सरकार को कोरोना के बढ़ते मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। शिवसेना ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह प्रॉपर तरीके से कोरोना के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और न तो मास्क पहन रहे हैं और न ही पदयात्राओं और रैलियों में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रख रहे हैं। सामने ने लिखा कि कोरोना का प्रकोप हर जगह है और यह लोगों के लिए जानलेवा है, इसकी फिक्र किसी को नहीं है। पश्चिम बंगाल में भाजपा को विजयी पताका फहरानी है, लेकिन इसके लिए कम-से-कम प्रधानमंत्री को कोरोना के संदर्भ में स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन नहीं करना चाहिए था?

शिवसेना ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में कोरोना का उतना जोर नहीं है, ऐसा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा जा रहा है। हो सकता है प्रधानमंत्री की सभा, भाजपा नेताओं के भव्य प्रचार दौरे के आसानी से होने तक कोरोना पश्चिम बंगाल में नहीं है, ऐसा कहा जाएगा। इस प्रकार की क्रूर और अमानवीय तरीके की राजनीति शुरू है। बता दें कि महाराष्ट्र में हर दिन करीब दस हजार नए मामले आ रहे हैं और कुल मामले 22,38,398  पार कर चुके हैं।